રોજીંદા જીવન માં આ રીતે કરો ભોલેનાથ સાથે જોડાયેલા આ કામ, કોઈ પણ મુશ્કેલીઓ હશે થઈ જશે દૂર

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ભગવાન શિવને પ્રસન્ન કરવા માટે આવ મંત્રોનો જાપ ખૂબ જ શક્તિશાળી જણાવવામાં આવ્યા છે. શાસ્ત્રમાં જણાવવામાં આવ્યું છે કે ભગવાન શિવના 108 નામોનો જાપ ખુબજ શક્તિ સાડી છે.

ભગવાન શિવને અનેક નામોથી ઓળખવામાં આવે છે. મહાદેવ, ભોલેશંકર, દેવોના દેવ બધા શંકરજીના પ્રખ્યાત નામોમાંથી એક છે. શાસ્ત્રોમાં વર્ણન છે કે ભગવાન શિવને પ્રસન્ન કરવા ખૂબ જ સરળ છે. તેમને ફક્ત 1 લોટો જળ અર્પણ કરીને પણ પ્રસન્ન કરી શકાય છે. આવી સ્થિતિમાં કોઈપણ મનોકામના પૂર્ણ કરવા અને ભોલેનાથની કૃપા મેળવવા માટે શાસ્ત્રોમાં મંત્રોના જાપનું મહત્વ જણાવવામાં આવ્યું છે.

જ્યોતિષ શાસ્ત્ર અનુસાર ભગવાન શિવની નિયમિત પૂજાની સાથે સાથે તેમની ચાલીસા, મંત્રોના જાપ તેમજ 108 નામનો જાપ કરવાથી વ્યક્તિને બધી જ પરેશાનીઓમાંથી મુક્તિ મળે છે. તેની સાથે જ સુખ-સમૃદ્ધિની પ્રાપ્તિ થાય છે. ચાલો જાણીએ ભગવાન શિવના 108 નામો વિશે.

ભગવાન શિવના આ 108 નામોથી કરો મંત્રોચ્ચાર
रुद्र: ऊं रुद्राय नमः।
शर्व: ऊं शर्वाय नमः।
भव: ऊं भवाय नमः।
उग्र: ऊं उग्राय नमः।
भीम: ऊं भीमाय नमः।
पशुपति: ऊं पशुपतये नमः।
ईशान: ऊं ईशानाय नमः।
महादेव: ऊं महादेवाय नमः।
शिव: ऊं शिवाय नमः।
महेश्वर: ऊं महेश्वराय नमः।
शम्भू: ऊं शंभवे नमः।
पिनाकि: ऊं पिनाकिने नमः।
शशिशेखर: ऊं शशिशेखराय नमः।
वामदेव: ऊं वामदेवाय नमः।
विरूपाक्ष: ऊं विरूपाक्षाय नमः।
कपर्दी: ऊं कपर्दिने नमः।
नीललोहित: ऊं नीललोहिताय नमः।
शंकर: ऊं शंकराय नमः।
शूलपाणि: ऊं शूलपाणये नमः।
खटवांगी: ऊं खट्वांगिने नमः।
विष्णुवल्लभ: ऊं विष्णुवल्लभाय नमः।
शिपिविष्ट: ऊं शिपिविष्टाय नमः।
अंबिकानाथ: ऊं अंबिकानाथाय नमः।
श्रीकण्ठ: ऊं श्रीकण्ठाय नमः।
भक्तवत्सल: ऊं भक्तवत्सलाय नमः।
त्रिलोकेश: ऊं त्रिलोकेशाय नमः।
शितिकण्ठ: ऊं शितिकण्ठाय नमः।
शिवाप्रिय: ऊं शिवा प्रियाय नमः।
कपाली: ऊं कपालिने नमः।
कामारी: ऊं कामारये नमः।
अंधकारसुरसूदन: ऊं अन्धकासुरसूदनाय नमः।
गंगाधर: ऊं गंगाधराय नमः।
ललाटाक्ष: ऊं ललाटाक्षाय नमः।
कालकाल: ऊं कालकालाय नमः।
कृपानिधि: ऊं कृपानिधये नमः।
परशुहस्त: ऊं परशुहस्ताय नमः।
मृगपाणि: ऊं मृगपाणये नमः।
जटाधर: ऊं जटाधराय नमः।
कैलाशी: ऊं कैलाशवासिने नमः।
कवची: ऊं कवचिने नमः।
कठोर: ऊं कठोराय नमः।
त्रिपुरान्तक: ऊं त्रिपुरान्तकाय नमः।
वृषांक: ऊं वृषांकाय नमः।
वृषभारूढ़: ऊं वृषभारूढाय नमः।
भस्मोद्धूलितविग्रह: ऊं भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः।
सामप्रिय: ऊं सामप्रियाय नमः।
स्वरमयी: ऊं स्वरमयाय नमः।
त्रयीमूर्ति: ऊं त्रयीमूर्तये नमः।
अनीश्वर: ऊं अनीश्वराय नमः।
सर्वज्ञ: ऊं सर्वज्ञाय नमः।
परमात्मा: ऊं परमात्मने नमः।
सोमसूर्याग्निलोचन: ऊं सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।
हवि: ऊं हविषे नमः।
यज्ञमय: ऊं यज्ञमयाय नमः।
सोम: ऊं सोमाय नमः।
पंचवक्त्र: ऊं पंचवक्त्राय नमः।
सदाशिव: ऊं सदाशिवाय नमः।
विश्वेश्वर: ऊं विश्वेश्वराय नमः।
वीरभद्र: ऊं वीरभद्राय नमः।
गणनाथ: ऊं गणनाथाय नमः।
प्रजापति: ऊं प्रजापतये नमः।
हिरण्यरेता: ऊं हिरण्यरेतसे नमः।
दुर्धर्ष: ऊं दुर्धर्षाय नमः।
गिरीश: ऊं गिरीशाय नमः।
अनघ: ऊं अनघाय नमः।
भुजंगभूषण: ऊं भुजंगभूषणाय नमः।
भर्ग: ऊं भर्गाय नमः।
गिरिधन्वा: ऊं गिरिधन्वने नमः।
गिरिप्रिय: ऊं गिरिप्रियाय नमः।
कृत्तिवासा: ऊं कृत्तिवाससे नमः।
पुराराति: ऊं पुरारातये नमः।
भगवान्: ऊं भगवते नमः।
प्रमथाधिप: ऊं प्रमथाधिपाय नमः।
मृत्युंजय: ऊं मृत्युंजयाय नमः।
सूक्ष्मतनु: ऊं सूक्ष्मतनवे नमः।
जगद्व्यापी: ऊं जगद्व्यापिने नमः।
जगद्गुरू: ऊं जगद्गुरुवे नमः।
व्योमकेश: ऊं व्योमकेशाय नमः।
महासेनजनक: ऊं महासेनजनकाय नमः।
चारुविक्रम: ऊं चारुविक्रमाय नमः।
भूतपति: ऊं भूतपतये नमः।
स्थाणु: ऊं स्थाणवे नमः।
अहिर्बुध्न्य: ऊं अहिर्बुध्न्याय नमः।
दिगम्बर: ऊं दिगंबराय नमः।
अष्टमूर्ति: ऊं अष्टमूर्तये नमः।
अनेकात्मा: ऊं अनेकात्मने नमः।
सात्विक: ऊं सात्विकाय नमः।
शुद्धविग्रह: ऊं शुद्धविग्रहाय नमः।
शाश्वत: ऊं शाश्वताय नमः।
खण्डपरशु: ऊं खण्डपरशवे नमः।
अज: ऊं अजाय नमः।
पाशविमोचन: ऊं पाशविमोचकाय नमः।
मृड: ऊं मृडाय नमः।
देव: ऊं देवाय नमः।
अव्यय: ऊं अव्ययाय नमः।
हरि: ऊं हरये नमः।
भगनेत्रभिद्: ऊं भगनेत्रभिदे नमः।
अव्यक्त: ऊं अव्यक्ताय नमः।
दक्षाध्वरहर: ऊं दक्षाध्वरहराय नमः।
हर: ऊं हराय नमः।
पूषदन्तभित्: ऊं पूषदन्तभिदे नमः।
अव्यग्र: ऊं अव्यग्राय नमः।
सहस्राक्ष: ऊं सहस्राक्षाय नमः।
सहस्रपाद: ऊं सहस्रपदे नमः।
अपवर्गप्रद: ऊं अपवर्गप्रदाय नमः।
अनन्त: ऊं अनन्ताय नमः।
तारक: ऊं तारकाय नमः।
परमेश्वर: ऊं परमेश्वराय नमः।